
सुनीता अपने दो माह के शिशु को टीकाकरण के लिए लाई थी। उसके हाथ में बड़ी सी दूध की बोतल देखकर मैंने पूछा “इतनी जल्दी अपना दूध बंद कर दिया?”
वह बोली “नहीं डॉकसाब, क्लीनिक में देर लगेगी, इसलिए बोतल साथ ले आई हूँ।”
कितनी विडंबना है। एक दुधमुंहा बच्चा सिर्फ इसलिए माँ के दूध से वंचित हो जाता है क्योंकि माँ को स्तनपान कराने के लिए एकांत नहीं मिलता। कुछ माताएँ झिझक के कारण नहीं पिला पातीं, और कुछ अज्ञानता में ऊपर का दूध शुरू कर देती हैं।
- “मुन्ने का पेट नहीं भरता…”
- “दूध कम आता है…”
- “मुझे बुखार है…”
- “अगले महीने नौकरी जॉइन करनी है…”
कभी मजबूरी, कभी गलतफहमी, और कभी बहाने, इन सबके बीच हम अपने शिशु का मौलिक अधिकार छीन लेते हैं।
पहले छह माह केवल माँ का दूध
शिशु के सम्पूर्ण विकास के लिए पहले छह माह तक केवल स्तनपान आवश्यक है—पानी भी नहीं। माँ का दूध सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि सुरक्षा कवच है।
शिशु को स्तनपान के लाभ
- माँ का दूध विशेष रूप से आपके शिशु के लिए बनता है, उसी की ज़रूरत के अनुसार पोषक तत्वों के साथ।
- यह हमेशा स्वच्छ, सुरक्षित और सही तापमान पर मिलता है।
- इसमें रोग प्रतिरोधक तत्व (antibodies) होते हैं जो संक्रमण से बचाते हैं।
- इसमें DHA जैसे तत्व होते हैं जो बुद्धि के विकास में सहायक हैं, जो पशु के दूध में नहीं होते।
- एलर्जी, दमा और दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है।
- यह मुफ्त है और माँ‑बच्चे के रिश्ते में गहरा भावनात्मक जुड़ाव लाता है।
माँ को स्तनपान के लाभ
- प्रसव के बाद रक्तस्राव कम करता है और एनीमिया से बचाता है।
- वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है।
- प्राकृतिक रूप से जन्मों में अंतर रखने में सहायक।
- स्तन और अंडाशय के कैंसर का खतरा कम करता है।
- हड्डियों की मजबूती बनाए रखता है।
समुदाय को लाभ
स्वस्थ शिशु = कम बीमारियाँ = कम छुट्टियाँ = अधिक उत्पादकता यह पूरे समाज के लिए लाभकारी है।
ऊपरी दूध के नुकसान
- गाय/भैंस का दूध उनके बछड़े के लिए बना होता है, उसके तत्व शिशु के लिए उपयुक्त नहीं।
- अधिक वसा और अपाच्य प्रोटीन शिशु को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
- ऑक्सिटोसिन जैसे हार्मोन और संक्रमण के कीटाणु दूध में मिल सकते हैं।
- महंगा होने के कारण पानी मिलाया जाता है, कुपोषण का खतरा बढ़ता है।
- बोतल की सफाई में कमी से दस्त और संक्रमण बढ़ते हैं।
- पशु‑दूध प्रोटीन से एलर्जी की कई समस्याएँ जन्म लेती हैं।
कैसे जानें कि दूध पर्याप्त है?
- शिशु 24 घंटे में 6 बार पेशाब करे
- एक माह में लगभग 500 ग्राम वजन बढ़े
यही दो संकेत पर्याप्त हैं। माँ के दूध को नापने का कोई और तरीका नहीं।
स्तनपान, कहीं भी, कभी भी
माँ चाहे बैठकर, लेटकर, घर में या बाहर, कहीं भी स्तनपान करा सकती है। अधिकतर बीमारियाँ और दवाएँ स्तनपान में बाधा नहीं बनतीं।
अपने शिशु के इस अधिकार को छिनने मत दीजिए। ताकि वह बड़ा होकर गर्व से कह सके—
“हाँ, मैंने अपनी माँ का दूध पिया है।”

Leave a Reply