
एक बाल रोग विशेषज्ञ की दृष्टि से
अभिभावक अक्सर मुझसे पूछते हैं— “डॉक्टर साहब, बच्चों को मांसाहार कब से देना शुरू करें?”
यह प्रश्न सरल लगता है, पर इसका उत्तर समझने के लिए दो मूल बातें जानना आवश्यक हैं:
- हम भोजन क्यों करते हैं
- शाकाहारी और मांसाहारी भोजन में क्या अंतर है
🍽️ हम भोजन क्यों करते हैं?
भोजन हमारी तीन महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करता है:
1) शारीरिक आवश्यकता
भोजन से हमें ऊर्जा मिलती है। जैसे ही रक्त में शुगर कम होती है, भूख लगने लगती है। शरीर की वृद्धि और संरचना के लिए आवश्यक प्रोटीन, वसा, खनिज और विटामिन भी भोजन से ही प्राप्त होते हैं। इस उद्देश्य के लिए भोजन का पौष्टिक होना ज़रूरी है—स्वाद गौण है।
2) मानसिक संतुष्टि
कई बार हम सिर्फ स्वाद के लिए खाते हैं, भले ही शरीर को उसकी आवश्यकता न हो। यही वह जगह है जहाँ जंक फूड धीरे‑धीरे आदत बन जाता है और आगे चलकर कई बीमारियों का कारण बनता है।
3) सामाजिक महत्व
भोजन हमारे सामाजिक जीवन का हिस्सा है—खुशी और दुख दोनों अवसरों पर लोग साथ बैठकर भोजन करते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
🥦 बनाम 🍗
शाकाहारी और मांसाहारी भोजन: बच्चों के संदर्भ में
मानसिक और सामाजिक दृष्टि से भोजन शाकाहारी हो या मांसाहारी—कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता। लेकिन शारीरिक आवश्यकता के संदर्भ में यह समझना ज़रूरी है कि भोजन में मौजूद पोषक तत्व किस रूप में हैं और शरीर उन्हें कितनी आसानी से पचा सकता है।
भोजन जितना सरल होगा, पाचन तंत्र के लिए उसे तोड़ना उतना ही आसान होगा। उदाहरण के लिए:
- पानी, शर्करा और नमक को पचाने में शरीर को लगभग कोई मेहनत नहीं करनी पड़ती
- अनाज को पचाने के लिए कई एंज़ाइम्स की आवश्यकता होती है
- मांस को पचाना इससे भी अधिक जटिल है
🧠 क्यों मैं बच्चों में मांसाहार देर से शुरू करने की सलाह देता हूँ
कई अध्ययनों और अपने अनुभव के आधार पर मेरा मत है कि बच्चों के आहार में मांस का सम्मिलन जितना देर से हो, उतना बेहतर है।
इसके पीछे कुछ स्पष्ट कारण हैं:
1) शाकाहारी भोजन सरल और आसानी से पचने योग्य होता है
इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर द्वारा आसानी से अवशोषित हो जाते हैं।
2) फाइबर केवल शाकाहारी भोजन में होता है
फाइबर पाचन को सुचारु रखता है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाता है।
3) मांस में पाई जाने वाली वसा बच्चों के लिए आदर्श नहीं
कुछ प्रकार की वसा आगे चलकर हृदय रोगों का जोखिम बढ़ाती हैं।
4) मांसाहारी प्रोटीन एलर्जी की संभावना बढ़ा सकता है
छोटे बच्चों में यह जोखिम अधिक होता है।
5) मांस में संक्रमण का खतरा अधिक
यदि मांस ठीक से न पके या बासी हो जाए, तो बैक्टीरिया और परजीवी गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
🍽️ बच्चों को भोजन कैसे दें? (व्यावहारिक सुझाव)
- भोजन संतुलित होना चाहिए—सभी आवश्यक पोषक तत्वों का मिश्रण
- भोजन स्वादिष्ट हो ताकि बच्चा रुचि ले
- भोजन आसानी से पचने योग्य हो
- बच्चों को नियमित समय पर भोजन दें
- उनका खाना अलग से परोसें
- भोजन के समय टीवी या मोबाइल जैसे व्यवधान न हों
- बच्चे का ध्यान भोजन पर रहे, तभी खाने की अच्छी आदतें बनती हैं
बच्चों का पाचन तंत्र नाजुक होता है। इसलिए शुरुआत में ऐसा भोजन देना ही बेहतर है जो सरल, सुरक्षित और पोषक हो—और यह गुण शाकाहारी भोजन में अधिक सहजता से मिलते हैं। मांसाहार बाद में भी शामिल किया जा सकता है, लेकिन धीरे‑धीरे और सही उम्र में।

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